पेंटिंग और पूनम की सोच: रिश्तों और कला के बीच एक भावनात्मक सफर

पेंटिंग और पूनम की सोच-भाग 14

पूनम घर आई, उसका शरीर हर तरफ दर्द कर रहा था। वह बेडरूम में गई और लेट गई। उसका पति घर पर नहीं था। वह विजेश के लिंग के बारे में सोचने लगी, कि किसी के पास इतना बड़ा और कठोर लिंग कैसे हो सकता है। उसने उसकी योनि और गुदा को कितनी  बुरी तरह से रगड़ा। उसके साथ वह अधिक से अधिक आनंद पाने के लिए आक्रामक तरीके से सब कुछ कर रही थी।अब उसके शरीर का हर हिस्सा दर्द कर रहा था।

विजेश को बताया था कि उसकी पत्नी उसके साथ कुछ भी नया करने की कोशिश नहीं करती। शायद, वह उसके बड़े लिंग से डरती होगी। वह अच्छी तरह जानती होगी  कि अगर वह उसके साथ गुदा मैथुन करने की कोशिश करती है तो गुदा के साथ क्या होगा । लेकिन मुझे उसका लिंग पसंद है। मुझे नए सेक्स तरीकों की कोशिश करने के लिए अपने शरीर को मजबूत बनाने की जरूरत है। पूनम मन ही मन मुस्कुराई।

पेंटिंग और पूनम की सोच

पूनम बिस्तर पर लेटी थी l उसकी नज़र दीवार पर लगी पेंटिंग पर गई — उस पेंटिंग पर, जो पिछले महीने उसने खुद चुनी थी। एक आदमी नदी के किनारे बैठा था, उसके पास एक छोटी सी नाव थी, और दूर क्षितिज पर सूरज डूब रहा था। शाम की हल्की रोशनी उस चित्र में एक रहस्यमय शांति भर रही थी।

सोचते-सोचते पूनम के मन में आदित्य का ख्याल आया — वह चित्रकार जिसने उसे बताया था कि हर पेंटिंग एक कहानी कहती है। आदित्य की बातें अब भी उसके मन में गूंजती थीं, जैसे किसी पुराने गीत की धुन। वह एक संवेदनशील कलाकार था, जिसने पूनम को पेंटिंग के भीतर छिपी भावनाओं को महसूस करना सिखाया था।

पूनम ने चित्र को ध्यान से देखा। “शायद वह आदमी अपने प्रियजनों का इंतजार कर रहा है,” उसने मन ही मन सोचा। “शायद वह उन्हें नदी के उस पार घर ले जाने आया है। शायद वह अपनी पत्नी, प्रेमिका या… मेरे जैसे किसी साधारण इंसान का इंतजार कर रहा है — जो जीवन की भागदौड़ में खुद को खो चुका है।”

उसकी सोच में गहराई आ रही थी, तभी दरवाज़ा खुला और रिंकू अंदर आया। उसकी आवाज़ में चिंता थी — “क्या हुआ? इस समय तुम बिस्तर पर क्यों हो? पूनम, क्या तुम ठीक हो?”

पूनम ने मुस्कराते हुए कहा, “मेरे शरीर में थोड़ा दर्द है, मैंने दवा ले ली है। लगता है जल्द ठीक हो जाऊंगी।”

रिंकू ने पास आकर बैठते हुए कहा, “तुम अब बहुत काम करने लगी हो। यह तुम्हारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। सप्ताहांत में काम मत करो, तुम्हें आराम की ज़रूरत है।”

पूनम को उसकी यह चिंता अच्छी लगी। ऐसा बहुत कम होता था कि रिंकू इस तरह उसकी सेहत के बारे में सोचता था। वह जानती थी कि उनका रिश्ता कई बार भावनात्मक दूरी से गुज़रा है, लेकिन ऐसे छोटे-छोटे पलों में वह फिर से जुड़ने की कोशिश करता है।

रिंकू नहाने चला गया। पूनम फिर से पेंटिंग की ओर देखने लगी। आदित्य की मुस्कान उसकी आंखों के सामने तैर गई। उसने वादा किया था कि वह फिर मिलेगा, लेकिन यह नहीं बताया था कि कहाँ। पूनम को यकीन था — “वह मुझे फिर से ढूंढ लेगा।” यह सोचकर उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।

कुछ देर बाद रिंकू नहाकर बाहर आया। पूनम ने पूछा, “तुम्हारा दिन कैसा रहा?”

रिंकू ने तौलिया रखते हुए कहा, “ठीक था। लेकिन ऑफिस में एक नई कर्मचारी आई है — बहुत बात करती है। मुझे सिरदर्द होने लगा था।”

पूनम ने हंसते हुए पूछा, “वह तुम्हारे साथ क्या बात कर रही थी?”

“मुझे उसे काम सिखाना है,” रिंकू ने कहा, “लेकिन यह मेरे लिए असंभव लगता है। मैंने बॉस से कह दिया कि मैं ऐसा नहीं कर सकता।”

पूनम ने मुस्कराते हुए कहा, “मुझे बताओ रिंकू, तुम उस पेंटिंग के बारे में क्या सोचते हो? मेरे एक दोस्त ने कहा था कि हर पेंटिंग एक कहानी कहती है।”

रिंकू ने दीवार की ओर देखा। कुछ पल चुप रहा, फिर बोला, “तुम्हारे दोस्त ने सही कहा। मुझे लगता है कि यह किसी मछुआरे की कहानी है — जो दिन भर की मेहनत के बाद नदी किनारे बैठा है। शायद वह किसी बड़े निर्णय से पहले ठहर गया है। सूरज का डूबना और नदी की गहराई उसे सोचने पर मजबूर कर रही है — क्या वह आगे बढ़े या लौट जाए?”

पूनम ने उसकी बातों को ध्यान से सुना और धीरे से कहा, “हाँ, यह संभव है।”

रिंकू खाना बनाने चला गया। पूनम अब अकेली थी, लेकिन उसका मन खाली नहीं था। वह आदित्य के बारे में सोचने लगी — उसकी आंखों में जो गहराई थी, वह अब पेंटिंग में दिख रही थी। वह सोचने लगी, “अगर वह मेरी तस्वीर बनाना चाहता है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।” उसने फुसफुसाते हुए कहा, जैसे खुद को समझा रही हो।

उस रात पूनम ने पहली बार महसूस किया कि कला, रिश्ते और सोच — ये सब एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। पेंटिंग में जो कहानी थी, वह शायद उसकी अपनी कहानी थी। एक स्त्री जो जीवन के किनारे बैठी है, निर्णय की दहलीज़ पर, और सोच रही है — क्या वह आगे बढ़े या लौट जाए?

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