पीले फूलों वाली लड़की – भाग 6

पीले फूलों वाली लड़की के साथ बलात्कार- भाग 6

पीले फूलों वाली लड़की के साथ बलात्कार- भाग 6

वह लोशन लाया और उसके छेद पर डाला, फिर अपने अंगूठे से अंदर धकेलने लगा l 

“प्लीज़ धीरे-धीरे, मुझे दर्द हो रहा है!”

उसने अपना अंगूठा उसके छेद में गहराई तक डाल दिया l  अंगूठा अब  फिसल रहा था l उसका गुदा लिंग के लिए तैयार था l वह लिंग  छेद पर लाया और अंदर धकेलने लगा l लिंग  अन्दर फिसल रहा था लेकिन छेद अभी भी बहुत टाइट था l  वह जोर-जोर से धक्का देने लगा , मीना  चीला रही थी और गिड़गिड़ा रही थी l वह  लिंग  तब तक अंदर धकेलता रहा जब तक कि उसके अंडकोष उसकी त्वचा को छूने न लगें,उसका छेद उसके मोटे लिंग  के लिए बहुत तंग था l उसकी सांसें तेज चल रही थीं। वह जबरदस्ती अपना लिंग गुदा में डाल रहा था। मीना का पिछवाड़ा कांप रहा था। वह दर्द से चीख रही थी।अटल लगातार अपना लिंग अंदर धकेल रहा था।

बह अपने शुक्राणुओं को अधिक देर तक नहीं रोक सका, उसने अपनी गति बढ़ा दी। उसके चूतड कांप रहे थे,वह आराम पाने के लिए उन्हें इधर-उधर हिला रही थी, लिंग उसके चूतड़ो के अंदर चाकू की तरह आगे पीछे हो रहा था l

वह उस पर झुका,उसने उसके कंधे की त्वचा को अपने दांतों में ले लिया और काटा l  जब वह दर्द से जोर से चिल्लाई तो  उसका लिंग  उसके चूतड़ों में फट गया और तेज़ दबाव के साथ शुक्राणु डालने लगा l कुछ समय उसने उसके चूतड़ो को दबाये रखा l 

वह उसकी पीठ पर गिर गया। “बेबी, तुम्हारे चूतड़ो का छेद फाड़ना सचमुच कठिन था, यह बहुत तंग था!”

फिर उसने अपना लिंग  बाहर निकाला, उसके छेद से शुक्राणु बहने लगे l  वह खड़ा हुआ और  शराब पीने लगा l कुछ ड्रिंक्स के बाद उसने फिर से उसकी योनि में संभोग किया और उसे वीर्य से भर दिया। 

“बेबी, मैं यह सुनिश्चित करना चाहता था कि तुम्हारी योनि पूरी तरह से खुल जाए और तुम्हें फिर कभी कोई दर्द न हो। अब मुझे यकीन है कि इसमें कुछ भी फटने या खुलने को नहीं है। तुम इसका भरपूर आनंद लो। अब तुम आज़ाद हो। अब तुम्हारे शरीर में मुझे कुछ भी खोलने की ज़रूरत नहीं है। हर छेद पूरी तरह से खुला हुआ है। अगर तुम घर वापस जाना चाहते हो  तो मेरे आदेश का पालन करो l मैं तुम्हें उसी स्थान पर छोड़ूंगा, उसी ढंग से , जिस ढंग से मैं तुम्हें यहां लाया था!”

उसने उसके शरीर को दोबारा बांधा और उसे अपने बैग में पैक कर लिया। बह उसे बही इमारत मे बापस ले गया और उसने उसे इमारत में खम्भे के साथ बाँध दिया ।  फिर उसकी बाँहें खोल दीं l वह जानता था कि उसे खुद को मुक्त करने के लिए कम से कम पंद्रह मिनट चाहिए l  यह उसके भागने के लिए पर्याप्त थे l  उसने उसका परस बापस उसे दिया और सुन्दर पीले फूलों के लिए धन्यवाद कहाँ l

फिर वह बहा से भागने लगा l 

guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments