जंगल में एक अजीब लड़की-भाग 1

जंगल में एक अजीब लड़की - भाग 1

जंगल में एक अजीब लड़की

दोपहर की धूप पूरे जोश में थी — आसमान पर जैसे आग बरस रही हो। इमरान अपने रोज़ के काम से लौट रहा था। रास्ते के किनारे फैला छोटा-सा जंगल हमेशा की तरह उसे अपनी ठंडी छांव से बुला रहा था। वह अकसर वहीं कुछ देर बैठ जाया करता था — पेड़ों की सरसराहट और दूर से आती पंछियों की आवाज़ें उसे अजीब-सी शांति देती थीं।

आज भी उसने वही किया। ज़मीन पर बैठकर उसने आंखें मूंदी ही थीं कि अचानक उसकी नज़र सामने पड़ी — करीब बीस बरस की एक लड़की जंगल की ओर जा रही थी। उसने हल्का गुलाबी सूट पहना था, जिस पर नाज़ुक फूलों का प्रिंट धूप में चमक रहा था। उसके कदम धीमे, लगभग बेफ़िक्र थे, जैसे उसे किसी चीज़ की परवाह ही न हो।

इमरान के भीतर एक अनजानी हलचल सी उठी। दोपहर की खामोशी में उस लड़की की मौजूदगी कुछ अलग ही लग रही थी — कुछ रहस्यमय, कुछ असामान्य। बिना सोचे समझे वह उठ खड़ा हुआ और उसके पीछे चल पड़ा।

लड़की जंगल के भीतर बढ़ती चली गई। पत्तों पर पड़ती धूप उसके चारों ओर सुनहरी परछाइयाँ बना रही थी। फिर वह एक छोटे तालाब के किनारे आकर रुक गई। कुछ पल वहीं ठहरकर उसने पानी की ओर देखा — और फिर धीरे-धीरे उसमें उतरने लगी।

इमरान ने सांस थाम ली। वह पास के पेड़ के पीछे छिप गया — और उसकी आंखें उसी पर टिक गईं।

पानी की सतह पर हल्की लहरें उठीं, जैसे तालाब खुद उस लड़की की मौजूदगी से चौंक गया हो। जैसे ही धूप उसके गीले कपड़ों पर पड़ने लगी, उसकी गोरी त्वचा चमकने लगी। फिर उसने धीरे से अपनी सलवार और अंडरवियर उतार दी। फिरोज का दिल तेजी से धड़कने लगा। यह एक सपने की तरह था। वह आधी नग्न अवस्था में पानी से बाहर आई और अपनी सलवार और अंडरवियर किनारे पर रख दी। वह फिर से पानी में चली गई। इमरान उत्सुकता से उसके अगले कदम का इंतजार कर रहा था। “क्या वह अपना टॉप भी उतारेगी?” उसने फुसफुसाते हुए कहा। उसके पानी में हिलते हुए नितंबों और नंगी योनि  इमरान को उत्तेजित करने लगी।

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