गोरी ने किया मदद का अनुरोध। इमरान खुश

गोरी ने किया मदद का अनुरोध। इमरान खुश - भाग 14

गोरी ने किया मदद का अनुरोध। इमरान खुश

ऑफिस का माहौल हमेशा की तरह शांत था। कंप्यूटरों की हल्की गुनगुनाहट के बीच  इमरान अपने फाइलों में खोया बैठा था, जब अचानक दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई। उसने सिर उठाया — सामने गोरी खड़ी थी। उसके चेहरे पर वही विनम्र मुस्कान थी, जो हर बार माहौल को थोड़ा नरम बना देती थी।

“ इमरान, आज आप कैसे हैं?” उसने मुस्कराकर पूछा। “आप तो बहुत व्यस्त लग रहे हैं।”

 इमरान ने हल्की हँसी के साथ जवाब दिया, “नहीं गोरी जी, आज काम ज़्यादा नहीं है। आप बताइए, कैसी हैं?”

“दरअसल…” गोरी थोड़ी झिझकी, “मेरी एक छोटी-सी विनती थी।”

 इमरान ने उत्सुकता से कहा, “कहिए न, मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ?”

“आपने एक बार बताया था न कि आप पहले सोने की दुकान में काम करते थे?” गोरी बोली। “मैं कुछ गहने खरीदना चाहती हूँ, लेकिन मुझे सोने की क्वालिटी के बारे में कुछ नहीं पता। क्या आप मेरे साथ चल सकते हैं, मुझे

 सही चीज़ चुनने में मदद मिल सके?”

 इमरान का दिल अचानक ज़ोरों से धड़कने लगा। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि गोरी उससे ऐसी कोई बात कहेगी।

“हां, बिल्कुल गोरी जी,” उसने थोड़ा संयत होकर कहा, “मैं आपकी मदद ज़रूर करूंगा। आप कब जाना चाहती हैं?”

“आज ही, काम के बाद… अगर आपके पास समय हो तो?”

 इमरान ने मुस्कराते हुए कहा, “कोई दिक्कत नहीं। क्या आपने दुकान तय कर ली है?”

“नहीं,” गोरी ने सिर हिलाया, “मुझे तो कुछ समझ नहीं आता। शायद आप ही तय कर लें।”

“ठीक है,” इमरान बोला, “तो हम वहीं चलेंगे, जहां मैं पहले काम करता था। आपको अच्छी चीज़ें मिलेंगी — और थोड़ी छूट भी।”

गोरी के चेहरे पर हल्की चमक आ गई। “थैंक यू,  इमरान। मैं काम के बाद बाहर ही आपका इंतज़ार करूंगी।”

काम के बाद वे टेक्सी लेकर बाजार पहुंचे। फिर फिरोज गोरी को एक दुकान पर ले गया।

“तो, यही वो दुकान है?” गोरी ने पूछा।
“हाँ,”  इमरान ने कहा, “मैं यहीं काम करता था। मालिक मुझे अब भी पहचानते हैं।”

गोरी ने कुछ गहने खरीदे। वे दुकान से बाहर आ गए।

“इमरान ,चलो बाजार में कुछ देखते हैं और बातें करते हैं। ऑफिस में तो हमें बात करने का भी समय नहीं मिलता।” इमरान  मुस्कुराया और उसके साथ चलने लगा।

वे कपड़ों के बाजार में चले गए, जैसा कि लड़कियां हमेशा पसंद करती हैं। गोरी ने एक टॉप उठाया और उसे अपने स्तनों पर रख  लिया। 

“यह कैसा लग रहा है?” 

इमरान  मुस्कुराया और बोला, “अच्छा है, लेकिन मुझे लगा कि आप केवल कुर्ता और साड़ी ही पहनती हैं।” 

“कभी-कभी मैं घर पर पहनती  हूं। क्या आप कुछ खरीदना चाहते हैं, इमरान ?”

“नहीं गोरी जी । क्या तुम वह टॉप ट्राई करना चाहती हो? क्या मैं तुम्हें उस टॉप में देख सकता हूँ।” 

गोरी शर्मा गई और मुस्कुराई। वह इमरान के सामने इसे पहनना नहीं चाहती थी, लेकिन उसने उसकी बहुत मदद की। वह ना कहने में असहाय महसूस कर रही थी। 

“ठीक है, अगर तुम्हें जल्दी नहीं है तो मैं कुछ टॉप ट्राई कर सकती हूँ।”

वह ट्राई रूम में चली गई। फिरोज का दिल तेजी से धड़कने लगा। कुछ देर बाद गोरी ने धीरे से दरवाजा खोला। नीले रंग का टॉप उसके मोटे गोल स्तनों पर एकदम सही लग रहा था। नंगा पेट और नवी बहुत आकर्षक लग रही थी, सलवार उसकी कूल्हा के चारों ओर कसी हुई थी। जैसे ही फिरोज ने उसे देखा उसने अपनी आँखें नीचे कर लीं और शर्मा गई। 

“यह कैसा लग रहा है?” गोरी ने धीरे से कहा। 

“आप एक परी की तरह लग रही हैं।” इमरान  मुस्कुराया। 

गोरी ने दरवाजा बंद कर दिया, उसने फिर से अपने पुराने कपड़े पहन लिए। उन्होंने भुगतान किया और बाजार से बाहर आ गए। इमरान  को लगा कि टॉप पहनने के बाद गोरी बहुत शांत हो गई । 

“गोरी जी अगर आप चाहें तो हम कैफे चल सकते हैं।” 

“माफ कीजिए इमरान , आज नहीं, हम सप्ताहांत में जा सकते हैं।”

गोरी ने धीरे से कहा, “आज के लिए धन्यवाद, इमरान । अगर आप न होते तो मैं शायद इतनी जल्दी कुछ चुन ही नहीं पाती।”

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