इमरान ने अपना प्यार किया जाहिर -आरजू आश्चर्यचकित

इमरान ने अपना प्यार किया जाहिर -आरजू आश्चर्यचकित - भाग 30

इमरान ने अपना प्यार किया जाहिर -आरजू आश्चर्यचकित

इमरान अपने कमरे में आया। वह सोच रहा था कि नीलम ने उससे क्या कहा। तभी आरज़ू आई और पूछा।

“ इमरान, क्या तुम चाय पीना चाहोगे?” उसकी आवाज़ और व्यवहार पहले जैसा ही था। 

इमरान ने उसे पकड़ लिया और जोश से उसके होंठों को चूम लिया। “इधर आओ, मैं तुमसे बात करना चाहता हूँ, आरजू।”

आरजू उसके पास बैठ गई। “क्या सब ठीक है?” आरजू ने उत्सुकता से पूछा l

“आरज़ू, मैं तुम्हें कुछ और भी बताना चाहता हूँ।”इमरान ने उसके हाथ पकड़ते हुए कहा, उसकी आँखों में उसके लिए प्यार झलक रहा था।

“ क्या?” आरज़ू ने गंभीरता से पूछा। 

 “मैं तुमसे प्यार करता हूँ, मैं तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ। कृपया सलमा से कुछ भी बात मत करना । मैं उसे नहीं चाहता। मैं तुम्हारे साथ खुश हूँ। हम साथ रहेगे।” इमरान ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा।

आरज़ू मुस्कुराई , इमरान अगर तुम सलमा के साथ रहना चाहते हो तो कोई बात नहीं। मुझे तो बस कभी-कभी तुम्हारा लिंग चाहिए। मैं सलमा कभी नहीं बन सकती।”

“मैंने तुम्हें बता दिया कि मैं क्या चाहता हूँ। सलमा की कहानी अब मेरे लिए पुरानी हो चुकी है। मैं उसे भूलना चाहता हूँ।” इमरान ने दृढ़ता से कहा।

“ठीक है, अगर तुम यही चाहते हो तो मैं सलमा से बात नहीं करूंगी। माँ के मेहमान आज फिर आ रहे है। हम एक साथ सो सकते हैं। हम रात को बात करेंगेl”

आरज़ू चली गई। फिरोज को उसकी चाल में अजीब सी खुशी दिखी।

इमरान को बहुत हल्कापन महसूस हो रहा था। वह खुश था कि वह आरजू को अपने प्यार के बारे में बता सका।

शाम का समय था। इमरान अपने कमरे में कुछ अखबार पढ़ रहा था। तभी सलमा कुछ किताबें लेकर उसके कमरे में आई। 

“इमरान , “क्या आपने यह किताब पढ़ी?” वह  थोड़ा हैरान हुआ कि सलमा अकेली आई । उसने किताबों की तरफ देखा और कहा, “मैं सिर्फ इसी किताब के बारे में जानता हूं। यह अच्छी है,”

 “तो मैं यह किताब ले लूंगी । अगर आप कहते हैं कि अच्छी है तो अच्छी ही होगी।”

“हाँ, यह अच्छा है।” इमरान ने अखबार पढ़ते हुए कहा।

“ इमरान, क्या तुम मुझसे नाराज हो? सलमा ने शरमाते हुए पूछा।”

“ नहीं, किस बात पर?” 

“अगले हफ्ते मैं स्कूल के बाद घर पर अकेली  रहूँगी । अगर तुम चाहो तो हम बात कर सकते हैं।”सलमा ने धीरे से कहा

“ ठीक है, अगर मुझे समय मिला तो मैं आऊँगा। तुम्हारे साथ चाय पीना अच्छा लगता है।” इमरान मुस्कुराया। सलमा कमरे से बाहर चली गई। वह  समझ गया, सलमा ने रिश्ता बनाने का फैसला कर लिया है। लेकिन अब उसे सलमा में कोई दिलचस्पी नहीं थी।

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